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mahabharat 12.282.42: भीष्मजी कहते हैं - राजन! महात्मा ब्रह्माजी की यह बात सुनकर वृक्ष, औषधियाँ और घास-फूस सब उसी प्रकार शीघ्रता से लौट गये, जैसे वे उनकी पूजा करके आये थे।   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.282.42 
भीष्म उवाच
ततो वृक्षौषधितृणमेवमुक्तं महात्मना।
ब्रह्माणमभिसम्पूज्य जगामाशु यथागतम्॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन! महात्मा ब्रह्माजी की यह बात सुनकर वृक्ष, औषधियाँ और घास-फूस सब उसी प्रकार शीघ्रता से लौट गये, जैसे वे उनकी पूजा करके आये थे।
 
Bhishmaji says - King! Upon hearing Mahatma Brahma say this, the trees, medicinal herbs and grass all returned as quickly as they had come after worshipping him.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)