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mahabharat 12.282.41: ब्रह्माजी ने कहा - यदि कोई मनुष्य संक्रान्ति, ग्रहण, पूर्णिमा, अमावस्या आदि पर्वों के समय कामनावश तुम्हें छेदेगा, तो उस पर तुम्हारे द्वारा ब्रह्महत्या का पाप लगेगा ॥ 41॥   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.282.41 
ब्रह्मोवाच
पर्वकाले तु सम्प्राप्ते यो वै च्छेदनभेदनम्।
करिष्यति नरो मोहात् तमेषानुगमिष्यति॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी ने कहा - यदि कोई मनुष्य संक्रान्ति, ग्रहण, पूर्णिमा, अमावस्या आदि पर्वों के समय कामनावश तुम्हें छेदेगा, तो उस पर तुम्हारे द्वारा ब्रह्महत्या का पाप लगेगा ॥ 41॥
 
Brahma said - If any person, out of desire, pierces you during the festival times like Sankranti, eclipse, full moon, new moon etc., then he will be charged with the murder of a brahmin by you. ॥ 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)