Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.282.4-5: उसके पार्श्वों पर प्रज्वलित और प्रकाशमान उल्काएँ गिरने लगीं। गिद्ध, कौए, बगुले आदि भयंकर पक्षी शब्द करने लगे और एक दूसरे से लिपटकर चक्र के समान वृत्रासुर के चारों ओर घूमने लगे॥4-5॥ | mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उसके पार्श्वों पर प्रज्वलित और प्रकाशमान उल्काएँ गिरने लगीं। गिद्ध, कौए, बगुले आदि भयंकर पक्षी शब्द करने लगे और एक दूसरे से लिपटकर चक्र के समान वृत्रासुर के चारों ओर घूमने लगे॥4-5॥
Blazing and luminous meteors began to fall on his sides. Fearsome birds like vultures, crows, herons etc. began to make their sounds and clinging to each other, began to revolve around Vritraasura like a wheel.॥ 4-5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥