Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.282.38: हे जगत के स्वामी! इस ब्राह्मण-हत्या का क्या परिणाम होगा? हम तो भगवान के क्रोध के कारण पहले से ही जड़-रूप में हैं; अतः कृपया हमें पुनः न मारें।   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  12.282.38 
अस्माकं ब्रह्मवध्याया: कोऽन्तो लोकपितामह।
दैवेनाभिहतानस्मान् न पुनर्हन्तुमर्हसि॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
हे जगत के स्वामी! इस ब्राह्मण-हत्या का क्या परिणाम होगा? हम तो भगवान के क्रोध के कारण पहले से ही जड़-रूप में हैं; अतः कृपया हमें पुनः न मारें।
 
'Lord of the world! What will be the end of this act of killing a brahmin? We are already in the immobile form due to the wrath of God; therefore, please do not kill us again.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)