Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.282.35: हे प्रभु! ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर हव्य और काव्य के भोक्ता भगवान अग्निदेव ने पितामह की आज्ञा स्वीकार कर ली। इस प्रकार ब्रह्महत्या का एक चौथाई भाग अग्नि में जल गया॥35॥ | mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे प्रभु! ब्रह्माजी के ऐसा कहने पर हव्य और काव्य के भोक्ता भगवान अग्निदेव ने पितामह की आज्ञा स्वीकार कर ली। इस प्रकार ब्रह्महत्या का एक चौथाई भाग अग्नि में जल गया॥35॥
Lord! On Brahmaji saying this, Lord Agnidev, the enjoyer of havya and poetry, accepted the order of that grandfather. In this way, one fourth of the Brahmahatya was burnt in the fire. 35॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥