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mahabharat 12.282.33-34: ब्रह्माजी बोले, "अग्निदेव! यदि कोई योग्य मनुष्य आपके जलते हुए स्थान पर पहुँचकर तमोगुण से आवृत होने के कारण स्वयं बीजों, औषधियों या रसों से आपकी पूजा न करे, तो यह ब्रह्महत्या तत्काल उस पर लगकर उसके भीतर निवास करने लगेगी; अतः हे हव्यवाहन! आपकी मानसिक चिन्ता दूर हो जाए॥ 33-34॥   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  12.282.33-34 
ब्रह्मोवाच
यस्त्वां ज्वलन्तमासाद्य स्वयं वै मानव: क्वचित्।
बीजौषधिरसैर्वह्ने न यक्ष्यति तमोवृत:॥ ३३॥
तमेषा यास्यति क्षिप्रं तत्रैव च निवत्स्यति।
ब्रह्मवध्या हव्यवाह व्येतु ते मानसो ज्वर:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले, "अग्निदेव! यदि कोई योग्य मनुष्य आपके जलते हुए स्थान पर पहुँचकर तमोगुण से आवृत होने के कारण स्वयं बीजों, औषधियों या रसों से आपकी पूजा न करे, तो यह ब्रह्महत्या तत्काल उस पर लगकर उसके भीतर निवास करने लगेगी; अतः हे हव्यवाहन! आपकी मानसिक चिन्ता दूर हो जाए॥ 33-34॥
 
Brahma said, "Agnidev! If any qualified human being reaches a place where you are burning and does not worship you himself with seeds, medicines or juices due to being covered by the Tamoguna, then this killing of a brahma will immediately fall on him and will start residing within him; therefore, Havyavaahan! Your mental anxiety should go away. ॥ 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)