Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.282.3-4h: नरेश्वर! उसके सम्पूर्ण शरीर में तीव्र उत्तेजना उत्पन्न हो गई। वह गहरी साँस लेने लगा। भरतनन्दन! वृत्रासुर के मुख से उसकी ही स्मृति से एक भयंकर सियार का रूप धारण करके अत्यंत भयंकर दुष्ट पुरुष निकला। 3 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
नरेश्वर! उसके सम्पूर्ण शरीर में तीव्र उत्तेजना उत्पन्न हो गई। वह गहरी साँस लेने लगा। भरतनन्दन! वृत्रासुर के मुख से उसकी ही स्मृति से एक भयंकर सियार का रूप धारण करके अत्यंत भयंकर दुष्ट पुरुष निकला। 3 1/2॥
Nareshwar! There was intense excitement throughout his body. He started taking a deep breath. Bharatnandan! From the mouth of Vritrasura, his very memory came out in the form of a fierce jackal in the form of a very terrible evil person. 3 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥