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mahabharat 12.282.2: उसका मुख जलने लगा। उसका रूप अत्यंत भयानक हो गया। उसके शरीर की कांति अत्यंत फीकी पड़ गई। उसका शरीर जोर-जोर से काँपने लगा और उसकी साँसें बहुत तेज चलने लगीं॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.282.2 
ज्वलितास्योऽभवद् घोरो वैवर्ण्यं चागमत् परम्।
गात्रकम्पश्च सुमहान् श्वासश्चाप्यभवन्महान्॥ २॥
 
 
अनुवाद
उसका मुख जलने लगा। उसका रूप अत्यंत भयानक हो गया। उसके शरीर की कांति अत्यंत फीकी पड़ गई। उसका शरीर जोर-जोर से काँपने लगा और उसकी साँसें बहुत तेज चलने लगीं॥2॥
 
His face started burning. His appearance became very scary. His body's glow became very pale. His body started shivering violently and his breathing became very fast.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)