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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  12.282.19-20h 
तस्या व्यपोहने शक्र: परं यत्नं चकार ह॥ १९॥
न चाशकत् तां देवेन्द्रो ब्रह्मवध्यां व्यपोहितुम्।
 
 
अनुवाद
देवेन्द्र ने उससे छुटकारा पाने के लिए बहुत प्रयास किया, लेकिन वह उसे किसी भी तरह से हटा नहीं सका।
 
Devendra made great efforts to get rid of it, but he could not remove it in any way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)