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mahabharat 12.282.18-19h: परन्तु ब्रह्महत्यारे ने उसका यत्नपूर्वक पीछा किया और उसे वहाँ भी पकड़ लिया। हे कुरुपुत्र! ब्रह्महत्यारे द्वारा पकड़े जाने पर इंद्र दुर्बल हो गए।   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 18-19h
 
 
श्लोक  12.282.18-19h 
अनुसृत्य तु यत्नात् स तथा वै ब्रह्महत्यया॥ १८॥
तदा गृहीत: कौरव्य निस्तेजा: समपद्यत।
 
 
अनुवाद
परन्तु ब्रह्महत्यारे ने उसका यत्नपूर्वक पीछा किया और उसे वहाँ भी पकड़ लिया। हे कुरुपुत्र! ब्रह्महत्यारे द्वारा पकड़े जाने पर इंद्र दुर्बल हो गए।
 
But the killer of a brahma followed him diligently and caught him there too. O son of Kuru! Indra became weak after being caught by the killer of a brahma. 18 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)