Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.282.17-18h: ब्रह्महत्यारे ने देवेन्द्र को पकड़ लिया और तुरन्त उनके शरीर से लिपट गया। ब्रह्महत्या के भय से इन्द्र उससे छूटने के लिए दौड़े और कमल के तने में प्रवेश कर कई वर्षों तक उसमें छिपे रहे। 17 1/2 | mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जग्राह वध्या देवेन्द्रं सुलग्ना चाभवत् तदा।
स हि तस्मिन् समुत्पन्ने ब्रह्मवध्याकृते भये॥ १७॥
नलिन्या बिसमध्यस्थ उवासाब्दगणान् बहून्।
अनुवाद
ब्रह्महत्यारे ने देवेन्द्र को पकड़ लिया और तुरन्त उनके शरीर से लिपट गया। ब्रह्महत्या के भय से इन्द्र उससे छूटने के लिए दौड़े और कमल के तने में प्रवेश कर कई वर्षों तक उसमें छिपे रहे। 17 1/2
The killer of a brahma caught hold of Devendra and immediately clung to his body. The fear of killing a brahma made Indra run to free himself from it and entered the stem of the lotus and remained hidden in it for many years. 17 1/2
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥