Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.282.13: भरतनन्दन! उसके बाल बिखरे हुए थे, उसकी आँखें बड़ी डरावनी थीं। उसके गले में मानव खोपड़ियों की माला थी। हे भरतश्रेष्ठ! वह चुड़ैल के समान दिखाई दे रही थी॥13॥ | mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रकीर्णमूर्धजा चैव घोरनेत्रा च भारत।
कपालमालिनी चैव कृत्येव भरतर्षभ॥ १३॥
अनुवाद
भरतनन्दन! उसके बाल बिखरे हुए थे, उसकी आँखें बड़ी डरावनी थीं। उसके गले में मानव खोपड़ियों की माला थी। हे भरतश्रेष्ठ! वह चुड़ैल के समान दिखाई दे रही थी॥13॥
Bharatanandan! Her hair was disheveled, her eyes were very scary. Around her neck was a garland of human skulls. O best of the Bharatas! She looked like a witch.॥ 13॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥