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mahabharat 12.282.11-12: कुरुनन्दन! तत्पश्चात वृत्रासुर के मृत शरीर से समस्त जगत को भयभीत करने वाली, भयंकर एवं क्रूर प्रकृति वाली ब्रह्महत्या प्रकट हुई। उसके दाँत अत्यंत विकराल थे। उसका स्वरूप कृष्ण और पिंगल वर्ण का था। वह देखने में अत्यंत डरावनी और विकृत थी।   |   mahabharat अध्याय 12.282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 11-12
 
 
श्लोक  12.282.11-12 
अथ वृत्रस्य कौरव्य शरीरादभिनि:सृता॥ ११॥
ब्रह्मवध्या महाघोरा रौद्रा लोकभयावहा।
करालदशना भीमा विकृता कृष्णपिङ्गला॥ १२॥
 
 
अनुवाद
कुरुनन्दन! तत्पश्चात वृत्रासुर के मृत शरीर से समस्त जगत को भयभीत करने वाली, भयंकर एवं क्रूर प्रकृति वाली ब्रह्महत्या प्रकट हुई। उसके दाँत अत्यंत विकराल थे। उसका स्वरूप कृष्ण और पिंगल वर्ण का था। वह देखने में अत्यंत डरावनी और विकृत थी।
 
Kurunandan! Thereafter, from the dead body of Vritrasura, Brahmahatya, of a terrible and cruel nature, which frightened the entire world, appeared. His teeth were very monstrous. His appearance was of Krishna and Pingal colors. She was very scary and deformed to look at.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)