श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 282: वृत्रासुरका वध और उससे प्रकट हुई ब्रह्महत्याका ब्रह्माजीके द्वारा चार स्थानोंमें विभाजन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.282.1 
भीष्म उवाच
वृत्रस्य तु महाराज ज्वराविष्टस्य सर्वश:।
अभवन् यानि लिङ्गानि शरीरे तानि मे शृणु॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, 'महाराज! ज्वर से पीड़ित वृत्रासुर के शरीर में जो लक्षण प्रकट हुए, उन्हें मुझसे सुनिए।' ॥1॥
 
Bhishma said, 'Maharaj! Listen to me about the symptoms that appeared in the body of Vritraasura who was suffering from fever.' ॥1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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