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श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  12.281.40 
भीष्म उवाच
आविश्यमाने दैत्ये तु ज्वरेणाथ महासुरे।
देवतानामृषीणां च हर्षान्नादो महानभूत्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं: हे राजन! जब महाबली वृत्रासुर के शरीर में ज्वर प्रवेश कर गया, तब देवताओं और ऋषियों की हर्ष भरी महान् पुकार वहाँ गूँज उठी।
 
Bhishma says: O King! When fever entered the body of the great demon Vritraasura, the great cries of joy of the gods and sages resounded there.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)