श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन  »  श्लोक 30-31h
 
 
श्लोक  12.281.30-31h 
ततो भगवतस्तेजो ज्वरो भूत्वा जगत‍्पते:॥ ३०॥
समाविशत् तदा रौद्रो वृत्रं लोकपतिं तदा।
 
 
अनुवाद
तब ब्रह्माण्ड के स्वामी भगवान शिव का भयंकर ज्वर लोकेश्वर वृत्र के शरीर में प्रविष्ट हो गया।
 
Then the fierce fever of Lord Shiva, the lord of the universe, entered the body of Lokeshwar Vrittra. 30 1/2.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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