श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.281.28 
ततो बुद्धिमुपागम्य भगवान् पाकशासन:।
योगेन महता युक्तस्तां मायां व्यपकर्षत॥ २८॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान् पक्षासन ने अपनी श्रेष्ठ बुद्धि का आश्रय लेकर तथा महान् योग से उस भ्रम को नष्ट कर दिया॥28॥
 
Then Lord Pakshasan, taking the shelter of his superior intellect and having great yoga, destroyed that illusion. 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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