श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.281.22 
वसिष्ठ उवाच
देवश्रेष्ठोऽसि देवेन्द्र दैत्यासुरनिबर्हण।
त्रैलोक्यबलसंयुक्त: कस्माच्छक्र विषीदसि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
वशिष्ठजी बोले - देवेन्द्र! आप सम्पूर्ण देवताओं में श्रेष्ठ हैं। दैत्यों और दानवों का नाश करने वाले शक्र! आप तीनों लोकों की शक्ति से संपन्न हैं; फिर आप इतने दुःखी क्यों हैं? 22॥
 
Vashishthaji said – Devendra! You are the best among all the gods. Shakra, the destroyer of demons and demons! You are endowed with the power of the three worlds; Then why are you in such sadness? 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd