श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन  »  श्लोक 20-21
 
 
श्लोक  12.281.20-21 
वृत्रस्तु कुरुशार्दूल महामायो महाबल:।
मोहयामास देवेन्द्रं मायायुद्धेन सर्वश:॥ २०॥
तस्य वृत्रार्दितस्याथ मोह आसीच्छतक्रतो:।
रथन्तरेण तं तत्र वसिष्ठ: समबोधयत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
कुरुश्रेष्ठ! महाबली एवं मायावी वृत्रासुर ने सब ओर से मायावी युद्ध करके इन्द्र को मोहित कर लिया। वृत्रासुर से पीड़ित इन्द्र मोहित हो गए। तब वशिष्ठजी ने रथन्तर समद्वारा इन्द्र को सचेत किया। 20-21॥
 
Kurushrestha! The mighty and illusive Vritrasur, by waging an illusory war on all sides, bewitched Lord Indra. Indra, who was suffering from Vritrasura, became infatuated. Then Vashishthaji alerted Indra there through Rathantar Samadwara. 20-21॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd