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श्री महाभारत
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पर्व 12: शान्ति पर्व
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अध्याय 281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन
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श्लोक 19
श्लोक
12.281.19
ततो देवगणा: क्रुद्धा: सर्वत: शरवृष्टिभि:।
अश्मवर्षमपोहन्त वृत्रप्रेरितमाहवे॥ १९॥
अनुवाद
यह देखकर देवतागण क्रोधित हो गए और उन्होंने युद्ध में सब ओर से बाणों की वर्षा करके वृत्रासुर द्वारा फेंकी गई पत्थरों की वर्षा को नष्ट कर दिया॥19॥
Seeing this the gods became enraged. They showered arrows from all sides in the battle and destroyed the shower of stones thrown by Vritrasura.॥ 19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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