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श्लोक 12.281.13  |
तत: समभवद् युद्धं त्रैलोक्यस्य भयंकरम्।
शक्रस्य च सुरेन्द्रस्य वृत्रस्य च महात्मन:॥ १३॥ |
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| अनुवाद |
| तत्पश्चात् देवराज इन्द्र और महाबली वृत्रासुर में घोर युद्ध छिड़ गया, जिससे तीनों लोकों के हृदय में भय व्याप्त हो गया॥13॥ |
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| Then a fierce battle broke out between Devaraj Indra and the mighty Vritraasura, which instilled fear in the hearts of all the three worlds.॥ 13॥ |
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