श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 281: इन्द्र और वृत्रासुरके युद्धका वर्णन  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.281.1 
युधिष्ठिर उवाच
अहो धर्मिष्ठता तात वृत्रस्यामिततेजस:।
यस्य विज्ञानमतुलं विष्णोर्भक्तिश्च तादृशी॥ १॥
 
 
अनुवाद
युधिष्ठिर ने पूछा - पितामह ! अमित तेजस्वी वृत्रासुर की धर्म-भक्ति अद्भुत थी। उसका विज्ञान भी अद्वितीय था और भगवान विष्णु के प्रति उसकी भक्ति भी उतनी ही उच्च कोटि की थी। 1॥
 
Yudhishthir asked – Grandfather! Amit Tejaswi Vritrasura's religious devotion was amazing. His science was also unique and his devotion towards Lord Vishnu was equally high class. 1॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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