Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.67: पृथ्वीनाथ! पीतवर्णी देवसर्ग और रक्तवर्णी अनुग्रहसर्ग में स्थित प्राणी कभी-कभी तामस कर्मों से आवृत होकर तिर्यग्योनिका में जा सकता है ॥67॥ | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हारिद्रवर्णे रक्ते वा वर्तमानस्तु पार्थिव।
तिर्यगेवानुपश्येत कर्मभिस्तामसैर्वृत:॥ ६७॥
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! पीतवर्णी देवसर्ग और रक्तवर्णी अनुग्रहसर्ग में स्थित प्राणी कभी-कभी तामस कर्मों से आवृत होकर तिर्यग्योनिका में जा सकता है ॥67॥
Prithvinath! The creature present in the yellow colored Devsarga and the blood colored Anugrahasarga can sometimes visit Tiryagyonika after being covered with tamasic deeds. 67॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥