Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.66: निष्पाप पितामह! उनका जन्म पवित्र कुल में हुआ था और स्वभाव से भी वे पवित्र थे। ऐसा प्रतीत होता है कि वे साध्य नामक देवता थे, इसीलिए वे पुनः संसार में नहीं लौटे। उन्हें पशु-पक्षी और नरक की योनियों से छुटकारा मिल गया। 66। | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
निष्पाप पितामह! उनका जन्म पवित्र कुल में हुआ था और स्वभाव से भी वे पवित्र थे। ऐसा प्रतीत होता है कि वे साध्य नामक देवता थे, इसीलिए वे पुनः संसार में नहीं लौटे। उन्हें पशु-पक्षी और नरक की योनियों से छुटकारा मिल गया। 66।
Sinless grandfather! He was born in a pure family and was pure by nature too. It seems he was a deity named Sadhya; that is why he did not return to the world again. He got rid of the births of animals and birds and hell. 66.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥