Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.64: अनंत एवं सनातन भगवान श्रीहरि समस्त कारणों को शक्ति और ऊर्जा से परिपूर्ण करके लीला रूप धारण करके लोकों में विचरण करते हैं। उस महापुरुष की गति को कोई नहीं रोक सकता। वे ही इस जगत् की रचना करते हैं। यह सम्पूर्ण अद्वितीय ब्रह्माण्ड उन्हीं में स्थित है ॥ 64॥ | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सर्वाण्यशून्यानि करोत्यनन्त:
सनातन: संचरते च लोकान्।
स चानिरुद्ध: सृजते महात्मा
तत्स्थं जगत् सर्वमिदं विचित्रम्॥ ६४॥
अनुवाद
अनंत एवं सनातन भगवान श्रीहरि समस्त कारणों को शक्ति और ऊर्जा से परिपूर्ण करके लीला रूप धारण करके लोकों में विचरण करते हैं। उस महापुरुष की गति को कोई नहीं रोक सकता। वे ही इस जगत् की रचना करते हैं। यह सम्पूर्ण अद्वितीय ब्रह्माण्ड उन्हीं में स्थित है ॥ 64॥
The infinite and eternal Lord Shri Hari fills all causes with power and energy and roams in the worlds wearing the form of Leela. No one can stop the movement of that great man. He is the one who creates this world. This entire unique universe is established in him. ॥ 64॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥