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mahabharat 12.280.6: यह सुनकर सनत्कुमार ने बुद्धिमान दैत्यराज वृत्रासुर से भगवान विष्णु की महिमा से युक्त ये अर्थपूर्ण वचन कहे-॥6॥   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.280.6 
सनत्कुमारस्तु तत: श्रुत्वा प्राह वचोऽर्थवत्।
विष्णोर्माहात्म्यसंयुक्तं दानवेन्द्राय धीमते॥ ६॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर सनत्कुमार ने बुद्धिमान दैत्यराज वृत्रासुर से भगवान विष्णु की महिमा से युक्त ये अर्थपूर्ण वचन कहे-॥6॥
 
On hearing this, Sanatkumara spoke these meaningful words filled with the glories of Lord Vishnu to the intelligent demon king Vritrasura -॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)