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mahabharat 12.280.59: भीष्म कहते हैं - हे कुन्तीपुत्र! ऐसा कहकर वृत्रासुर ने अपने प्राणों को भगवान् में एकाग्र करके, उनका ध्यान करते हुए प्राण त्याग दिए और भगवान् के परम धाम को प्राप्त हुआ।   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 59
 
 
श्लोक  12.280.59 
भीष्म उवाच
एवमुक्त्वा स कौन्तेय वृत्र: प्राणानवासृजत्।
योजयित्वा तथाऽऽत्मानं परं स्थानमवाप्तवान्॥ ५९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - हे कुन्तीपुत्र! ऐसा कहकर वृत्रासुर ने अपने प्राणों को भगवान् में एकाग्र करके, उनका ध्यान करते हुए प्राण त्याग दिए और भगवान् के परम धाम को प्राप्त हुआ।
 
Bhishma says - O son of Kunti! Having said this, Vritraasura, having concentrated his soul on the Supreme Being, while meditating on Him, gave up his life and attained the Supreme Abode of the Supreme Being.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)