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mahabharat 12.280.58: हे प्रभु! महर्षे! यह परम तेजस्वी, अनंत और सर्वव्यापी भगवान विष्णु का अनंत शक्तिशाली संसार चक्र चल रहा है। यह भगवान विष्णु का सनातन स्थान है, जहाँ से समस्त सृष्टियाँ आरम्भ होती हैं। महात्मा विष्णु ही सर्वश्रेष्ठ पुरुष हैं। यह संपूर्ण जगत उन्हीं में स्थित है। 58॥   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  12.280.58 
प्रवृत्तमेतद् भगवन् महर्षे
महाद्युतेश्चक्रमनन्तवीर्यम्।
विष्णोरनन्तस्य सनातनं तत्
स्थानं सर्गा यत्र सर्वे प्रवृत्ता:।
स वै महात्मा पुरुषोत्तमो वै
तस्मिन् जगत‍् सर्वमिदं प्रतिष्ठितम्॥ ५८॥
 
 
अनुवाद
हे प्रभु! महर्षे! यह परम तेजस्वी, अनंत और सर्वव्यापी भगवान विष्णु का अनंत शक्तिशाली संसार चक्र चल रहा है। यह भगवान विष्णु का सनातन स्थान है, जहाँ से समस्त सृष्टियाँ आरम्भ होती हैं। महात्मा विष्णु ही सर्वश्रेष्ठ पुरुष हैं। यह संपूर्ण जगत उन्हीं में स्थित है। 58॥
 
Lord! Maharshe! This infinitely powerful world cycle of the very brilliant, infinite and omnipresent Lord Vishnu is going on. This is the eternal place of Lord Vishnu, from where all creations begin. Mahatma Vishnu is the best man. This entire world is established in him only. 58॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)