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mahabharat 12.280.52: यदि प्रलय के समय जो जीव देवता गति में थे, वे अपने कर्मों का फल भोगने से पहले ही प्रलय को प्राप्त हो जाते हैं, तो दूसरे कल्प में जब पुनः मनुष्य योनि उत्पन्न होती है, तब वे शेष फलों को भोगने के लिए उन्हीं स्थानों को प्राप्त होते हैं, जहाँ वे पिछले कल्प में प्राप्त हुए थे। किन्तु जो कल्प के अंत में उस योनि से संबंधित अपने कर्मों के फलों का भोग पूरा कर लेते हैं, वे स्वर्ग के नाश के बाद अगले कल्प में समान कर्म करने वाले अन्य प्राणियों की तरह मनुष्य योनि को प्राप्त होते हैं॥ 52॥   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  12.280.52 
प्रजाविसर्गं तु सशेषकाले
स्थानानि स्वान्येव सरन्ति जीवा:।
नि:शेषतस्तत्पदं यान्ति चान्ते
सर्वे देवा ये सदृशा मनुष्या:॥ ५२॥
 
 
अनुवाद
यदि प्रलय के समय जो जीव देवता गति में थे, वे अपने कर्मों का फल भोगने से पहले ही प्रलय को प्राप्त हो जाते हैं, तो दूसरे कल्प में जब पुनः मनुष्य योनि उत्पन्न होती है, तब वे शेष फलों को भोगने के लिए उन्हीं स्थानों को प्राप्त होते हैं, जहाँ वे पिछले कल्प में प्राप्त हुए थे। किन्तु जो कल्प के अंत में उस योनि से संबंधित अपने कर्मों के फलों का भोग पूरा कर लेते हैं, वे स्वर्ग के नाश के बाद अगले कल्प में समान कर्म करने वाले अन्य प्राणियों की तरह मनुष्य योनि को प्राप्त होते हैं॥ 52॥
 
If the living beings who were in the state of devataa (divine state) at the time of Pralaya (destruction) attain dissolution before they have finished enjoying the fruits of their actions, then in another kalpa when humans are created again, they attain the same places which they had attained in the previous kalpa to enjoy the remaining fruits. But those who have completed the enjoyment of the fruits of their actions related to that species at the end of the kalpa, after the destruction of the heaven, attain human species like other creatures having similar actions in the next kalpa.॥ 52॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)