Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.51: ‘जिन लोगों के सूक्ष्म, स्थूल और कारण शरीर ज्ञानरूपी अग्नि से दग्ध हो गए हैं, वे लोग अर्थात् योगीजन प्रलयकाल में सदैव परमेश्वर को प्राप्त होते हैं और जो ब्रह्म से नीचे के लोकों में रहने वाले आध्यात्मिक दिव्य स्वभाव से संपन्न साधक हैं, वे सभी परब्रह्म को प्राप्त होते हैं॥51॥ | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
संहारकाले परिदग्धकाया
ब्रह्माणमायान्ति सदा प्रजा हि।
चेष्टात्मनो देवगणाश्च सर्वे
ये ब्रह्मलोकादपरा: स्म तेऽपि॥ ५१॥
अनुवाद
‘जिन लोगों के सूक्ष्म, स्थूल और कारण शरीर ज्ञानरूपी अग्नि से दग्ध हो गए हैं, वे लोग अर्थात् योगीजन प्रलयकाल में सदैव परमेश्वर को प्राप्त होते हैं और जो ब्रह्म से नीचे के लोकों में रहने वाले आध्यात्मिक दिव्य स्वभाव से संपन्न साधक हैं, वे सभी परब्रह्म को प्राप्त होते हैं॥51॥
‘Those people whose subtle, gross and causal bodies have been burnt by the fire of knowledge, those people i.e. the yogis always attain the Supreme God in the time of doomsday and all those seekers who are blessed with spiritual divine nature living in the worlds below Brahma, they all attain the Supreme Brahma. 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥