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mahabharat 12.280.4: राजन! दैत्यराज वृत्र और शुक्राचार्य से पूजित होकर सनत्कुमार मुनि एक बहुमूल्य सिंहासन पर बैठे॥4॥   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.280.4 
स पूजितोऽसुरेन्द्रेण मुनिनोशनसा तथा।
निषसादासने राजन् महार्हे मुनिपुङ्गव:॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राजन! दैत्यराज वृत्र और शुक्राचार्य से पूजित होकर सनत्कुमार मुनि एक बहुमूल्य सिंहासन पर बैठे॥4॥
 
King! After being worshipped by the demon king Vritra and the sage Shukracharya, the sage Sanatkumara sat on a precious throne. ॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)