Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.34: दैत्यराज! श्वेत रंग निर्मल, शोकरहित और प्रयत्नरहित है, अतः सिद्धि देने वाला है। दितिकुलपुत्र! हजारों योनियों में जन्म लेने के बाद जीवात्मा मनुष्य योनि में आकर ही सिद्धि प्राप्त करता है॥ 34॥ | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दैत्यराज! श्वेत रंग निर्मल, शोकरहित और प्रयत्नरहित है, अतः सिद्धि देने वाला है। दितिकुलपुत्र! हजारों योनियों में जन्म लेने के बाद जीवात्मा मनुष्य योनि में आकर ही सिद्धि प्राप्त करता है॥ 34॥
'Demon King! The white colour is pure, devoid of sorrow and without any effort, hence it is a provider of success. Son of Ditikul! After taking birth in thousands of species, a soul attains success only after coming to human species. ॥ 34॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥