Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.21-22: दैत्यराज! पृथ्वी को भगवान विष्णु के दो चरण समझो, स्वर्ग को उनका सिर समझो, ये चारों दिशाएँ उनकी चार भुजाएँ हैं, आकाश उनके कान हैं, तेजोमय सूर्य उनकी आँख है, मन चन्द्रमा है, बुद्धि (महत्तत्त्व) उनका नित्य ज्ञान है और जल उनकी रसना इन्द्रिय है॥21-22॥ | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
दैत्यराज! पृथ्वी को भगवान विष्णु के दो चरण समझो, स्वर्ग को उनका सिर समझो, ये चारों दिशाएँ उनकी चार भुजाएँ हैं, आकाश उनके कान हैं, तेजोमय सूर्य उनकी आँख है, मन चन्द्रमा है, बुद्धि (महत्तत्त्व) उनका नित्य ज्ञान है और जल उनकी रसना इन्द्रिय है॥21-22॥
'Demon king! Consider the earth as the two feet of Lord Vishnu, consider the heaven as his head, these four directions are his four arms, the sky is his ears, the radiant sun is his eye, the mind is the moon, the intellect (mahattattva) is his daily knowledge and water is his sense of taste. 21-22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥