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mahabharat 12.280.2: दैत्यों में श्रेष्ठ! मैं तुम्हें भगवान विष्णु का माहात्म्य सुनाता हूँ, जिनका सिर और आकाश भी अनन्त हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.280.2 
मूर्धा यस्य त्वनन्तं च स्थानं दानवसत्तम।
तस्याहं ते प्रवक्ष्यामि विष्णोर्माहात्म्यमुत्तमम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
दैत्यों में श्रेष्ठ! मैं तुम्हें भगवान विष्णु का माहात्म्य सुनाता हूँ, जिनका सिर और आकाश भी अनन्त हैं।
 
Best of demons! I will tell you the greatness of Lord Vishnu whose head and space are also infinite.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)