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mahabharat 12.280.19: श्रीमान्, भगवान नारायण हरि आदि-अन्त से रहित हैं। वे ही जीवों की रचना करते हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  12.280.19 
अनादिनिधन: श्रीमान् हरिर्नारायण: प्रभु:।
देव: सृजति भूतानि स्थावराणि चराणि च॥ १९॥
 
 
अनुवाद
श्रीमान्, भगवान नारायण हरि आदि-अन्त से रहित हैं। वे ही जीवों की रचना करते हैं।
 
'Sir, Lord Narayan Hari is without beginning and end. They are the ones who create living creatures.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)