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कर्मणा स्वनुरक्तानि विरक्तानि च दानव।
यथा कर्मविशेषांश्च प्राप्नुवन्ति तथा शृणु॥ १७॥
अनुवाद
हे दनुनंदन! कर्मों में आसक्त और विरक्त जीव किस प्रकार राग और विराग के कारणरूपी नाना कर्मों को प्राप्त होते हैं, इसे सुनो॥17॥
'Danunandan! Listen to how the living beings who are attached to and detached from action, attain the various actions which are the cause of attachment and detachment.॥ 17॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥