Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.14: जैसे तिल और सरसों का तेल थोड़े से फूल और माला से लेप करने पर भी अपनी सुगंध नहीं छोड़ते, वैसे ही थोड़े से प्रयास से न तो दोष दूर होते हैं और न सूक्ष्म ब्रह्म का साक्षात्कार ही हो सकता है ॥14॥ | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जैसे तिल और सरसों का तेल थोड़े से फूल और माला से लेप करने पर भी अपनी सुगंध नहीं छोड़ते, वैसे ही थोड़े से प्रयास से न तो दोष दूर होते हैं और न सूक्ष्म ब्रह्म का साक्षात्कार ही हो सकता है ॥14॥
Just as sesame and mustard oil do not give up their fragrance when smeared with a few flowers and garlands, similarly, with a little effort neither the defects are removed nor the subtle Brahma can be realized. ॥ 14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥