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mahabharat 12.280.13: जिस प्रकार मनुष्य अपने शरीर से थोड़ी-सी धूल को साधारण प्रयास से ही मिटा सकता है, उसी प्रकार वह महान प्रयास और बार-बार प्रयास करने से अपने शरीर से राग, द्वेष आदि दोषों को दूर कर सकता है॥13॥   |   mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.280.13 
लीलयाल्पं यथा गात्रात् प्रमृज्यादात्मनो रज:।
बहुयत्नेन महता दोषनिर्हरणं तथा॥ १३॥
 
 
अनुवाद
जिस प्रकार मनुष्य अपने शरीर से थोड़ी-सी धूल को साधारण प्रयास से ही मिटा सकता है, उसी प्रकार वह महान प्रयास और बार-बार प्रयास करने से अपने शरीर से राग, द्वेष आदि दोषों को दूर कर सकता है॥13॥
 
‘Just as a man can wipe off the little dust from his body with simple effort, similarly, with great effort and repeated efforts, he can remove the defects like love, hatred etc. from his body.॥ 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)