Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.280.10: ‘जो मनुष्य बाह्य (यज्ञ आदि) और आन्तरिक (शम, दम आदि) कर्मों में प्रवृत्त होकर मन में स्थिरता प्राप्त करता है, अर्थात् मन को स्थिर करके बुद्धि के द्वारा उसे शुद्ध बनाता है, वह परलोक में अक्षय सुख (मोक्ष) प्राप्त करता है। 10॥ | mahabharat अध्याय 12.280: वृत्रासुरको सनत्कुमारका अध्यात्मविषयक उपदेश देना और उसकी परमगति तथा भीष्मद्वारा युधिष्ठिरकी शंकाका निवारण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
‘जो मनुष्य बाह्य (यज्ञ आदि) और आन्तरिक (शम, दम आदि) कर्मों में प्रवृत्त होकर मन में स्थिरता प्राप्त करता है, अर्थात् मन को स्थिर करके बुद्धि के द्वारा उसे शुद्ध बनाता है, वह परलोक में अक्षय सुख (मोक्ष) प्राप्त करता है। 10॥
‘The one who, by getting engaged in external (yajna etc.) and internal (sham, dam etc.) deeds, attains stability in the mind, i.e. stabilizes the mind and makes it pure through the intellect, he attains inexhaustible happiness (moksha) in the next world. 10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥