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mahabharat 12.28.9: जैसे शिकारी अपने बाणों से हिरणों को आगे बढ़ने से रोकते हैं, वैसे ही राजा भी मर्यादा लांघकर अनुचित रीति से दूसरों का धन चुराने वाले मनुष्य को दण्ड देकर उसे उस कुमार्ग पर चलने से रोकते हैं ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.28.9 
तमतिक्रान्तमर्यादमाददानमसाम्प्रतम्।
प्रतिषेधन्ति राजानो लुब्धा मृगमिवेषुभि:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जैसे शिकारी अपने बाणों से हिरणों को आगे बढ़ने से रोकते हैं, वैसे ही राजा भी मर्यादा लांघकर अनुचित रीति से दूसरों का धन चुराने वाले मनुष्य को दण्ड देकर उसे उस कुमार्ग पर चलने से रोकते हैं ॥9॥
 
Just as hunters stop deer from moving forward with their arrows, similarly, kings by punishing a person who crosses the limits and steals others' wealth in an improper manner, stop him from following that evil path. ॥9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)