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mahabharat 12.28.54: यहाँ से कोई भी मनुष्य इन भौतिक आँखों से स्वर्ग और नरक को नहीं देख सकता। शास्त्र ही एकमात्र ऐसे नेत्र हैं जिनसे पुण्यात्माओं को उन्हें देखना होता है, अतः हे मनुष्यों के स्वामी! आप यहाँ उन शास्त्रों के अनुसार आचरण करें॥ 54॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 54
 
 
श्लोक  12.28.54 
न चैव पुरुषो द्रष्टा स्वर्गस्य नरकस्य च।
आगमस्तु सतां चक्षुर्नृपते तमिहाचर॥ ५४॥
 
 
अनुवाद
यहाँ से कोई भी मनुष्य इन भौतिक आँखों से स्वर्ग और नरक को नहीं देख सकता। शास्त्र ही एकमात्र ऐसे नेत्र हैं जिनसे पुण्यात्माओं को उन्हें देखना होता है, अतः हे मनुष्यों के स्वामी! आप यहाँ उन शास्त्रों के अनुसार आचरण करें॥ 54॥
 
No human being can see heaven and hell from here with these physical eyes. The scriptures are the only eyes that the virtuous have to see them, so O Lord of men! You should behave here according to those scriptures. ॥ 54॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)