Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.28.51: (आस्तिकों की मान्यता के अनुसार) शरीर की उत्पत्ति जीव (चेतन) से होनी चाहिए अथवा (नास्तिकों की मान्यता के अनुसार) जीव की उत्पत्ति शरीर से होनी चाहिए। सामान्यतः पत्नी, पुत्र आदि या अन्य सम्बन्धियों के साथ जो मिलन होता है, वह मार्ग में मिलने वाले यात्रियों के समान ही होता है ॥51॥ | mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(आस्तिकों की मान्यता के अनुसार) शरीर की उत्पत्ति जीव (चेतन) से होनी चाहिए अथवा (नास्तिकों की मान्यता के अनुसार) जीव की उत्पत्ति शरीर से होनी चाहिए। सामान्यतः पत्नी, पुत्र आदि या अन्य सम्बन्धियों के साथ जो मिलन होता है, वह मार्ग में मिलने वाले यात्रियों के समान ही होता है ॥51॥
(According to the belief of theists) Should the body originate from the living being (conscious) or (According to the belief of atheists) should the living being originate from the body. In general, the gathering that happens with wife, son etc. or other relatives is just like the travelers we meet on the road. 51॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥