श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.28.5 
अश्मोवाच
उत्पन्नमिममात्मानं नरस्यानन्तरं तत:।
तानि तान्यनुवर्तन्ते दु:खानि च सुखानि च॥ ५॥
 
 
अनुवाद
अश्मा ने कहा, 'हे राजन! जब मनुष्य इस शरीर में जन्म लेता है, तो सुख-दुःख भी उसके पीछे-पीछे आते हैं।॥5॥
 
Ashma said, 'O King! When a human being takes birth in this body, happiness and sorrow also follow him. ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)