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mahabharat 12.28.49: इस संसार में उत्पन्न होने वाले सभी प्राणियों के दिन, रात, वर्ष, मास और पखवाड़े एक बार बीत जाने पर कभी वापस नहीं आते ॥ 49॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  12.28.49 
न ह्यहानि निवर्तन्ते न मासा न पुन: समा:।
जातानां सर्वभूतानां न पक्षा न पुन: क्षपा:॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
इस संसार में उत्पन्न होने वाले सभी प्राणियों के दिन, रात, वर्ष, मास और पखवाड़े एक बार बीत जाने पर कभी वापस नहीं आते ॥ 49॥
 
The days, nights, years, months and fortnights of all beings born in this world, once passed, never return. ॥ 49॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)