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mahabharat 12.28.48: इसी प्रकार शास्त्रों के अध्ययन और अभ्यास में लगे हुए विद्वान, तपस्वी, दानशील और त्यागी पुरुष भी बुढ़ापे और मृत्यु को पार नहीं कर पाते ॥ 48॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  12.28.48 
तथैव तपसोपेता: स्वाध्यायाभ्यसने रता:।
दातारो यज्ञशीलाश्च न तरन्ति जरान्तकौ॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
इसी प्रकार शास्त्रों के अध्ययन और अभ्यास में लगे हुए विद्वान, तपस्वी, दानशील और त्यागी पुरुष भी बुढ़ापे और मृत्यु को पार नहीं कर पाते ॥ 48॥
 
Similarly, even the learned, ascetic, charitable and sacrificial men who are engaged in the study and practice of the scriptures, are unable to overcome old age and death. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)