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mahabharat 12.28.42: यद्यपि विद्वान् पुरुष कहते हैं कि परलोक न तो हमारी आँखों के सामने है और न ही वह पहले कभी देखा गया है, तथापि जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे शास्त्रों की आज्ञाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए और उनके वचनों पर विश्वास करना चाहिए ॥ 42॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 42
 
 
श्लोक  12.28.42 
न दृष्टपूर्वं प्रत्यक्षं परलोकं विदुर्बुधा:।
आगमांस्त्वनतिक्रम्य श्रद्धातव्यं बुभूषता॥ ४२॥
 
 
अनुवाद
यद्यपि विद्वान् पुरुष कहते हैं कि परलोक न तो हमारी आँखों के सामने है और न ही वह पहले कभी देखा गया है, तथापि जो मनुष्य अपना कल्याण चाहता है, उसे शास्त्रों की आज्ञाओं का उल्लंघन नहीं करना चाहिए और उनके वचनों पर विश्वास करना चाहिए ॥ 42॥
 
Although learned men say that the other world is neither before our eyes nor has it been seen before, yet a man who desires his own welfare should not violate the injunctions of the scriptures and should believe in their words. ॥ 42॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)