Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.28.37: इस संसार में वे धनवान पुरुष जिनकी सेवा में बहुत सी सुन्दर स्त्रियाँ गीत और बाजे लेकर उपस्थित रहती हैं तथा वे अनाथ मनुष्य जो दूसरों का अन्न खाकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं, काल उन सबके प्रति समान रूप से दयालु है ॥37॥ | mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
ये चैव पुरुषा: स्त्रीभिर्गीतवाद्यैरुपस्थिता:।
ये चानाथा: परान्नादा: कालस्तेषु समक्रिय:॥ ३७॥
अनुवाद
इस संसार में वे धनवान पुरुष जिनकी सेवा में बहुत सी सुन्दर स्त्रियाँ गीत और बाजे लेकर उपस्थित रहती हैं तथा वे अनाथ मनुष्य जो दूसरों का अन्न खाकर अपना जीवन निर्वाह करते हैं, काल उन सबके प्रति समान रूप से दयालु है ॥37॥
In this world, those rich men in whose service many beautiful women attend with songs and musical instruments and those orphan people who survive on the food of others, Time is equally kind to all of them. ॥ 37॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥