Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.28.36: जैसे समुद्र में एक ओर से लकड़ी का एक टुकड़ा आता है और दूसरी ओर से दूसरा और दोनों कुछ देर के लिए मिलते हैं और मिलकर फिर अलग हो जाते हैं, वैसे ही यहाँ भी जीव मिलते और अलग होते रहते हैं ॥36॥ | mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यथा काष्ठं च काष्ठं च समेयातां महोदधौ।
समेत्य च व्यपेयातां तद्वद् भूतसमागम:॥ ३६॥
अनुवाद
जैसे समुद्र में एक ओर से लकड़ी का एक टुकड़ा आता है और दूसरी ओर से दूसरा और दोनों कुछ देर के लिए मिलते हैं और मिलकर फिर अलग हो जाते हैं, वैसे ही यहाँ भी जीव मिलते और अलग होते रहते हैं ॥36॥
Just as in the ocean, a piece of wood comes from one side and another from the other side and both come together for a while and after meeting, they get separated again, in the same way here the creatures keep coming together and getting separated. ॥ 36॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥