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mahabharat 12.28.33: काल के अतिरिक्त कौन वायु, आकाश, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, दिन, रात्रि, तारे, नदियाँ और पर्वतों को उत्पन्न और धारण करता है? ॥33॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.28.33 
वायुमाकाशमग्निं च चन्द्रादित्यावह:क्षपे।
ज्योतींषि सरित: शैलान् क: करोति बिभर्ति च॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
काल के अतिरिक्त कौन वायु, आकाश, अग्नि, चन्द्रमा, सूर्य, दिन, रात्रि, तारे, नदियाँ और पर्वतों को उत्पन्न और धारण करता है? ॥33॥
 
Who, apart from Time, creates and sustains the air, sky, fire, moon, sun, day, night, stars, rivers and mountains? ॥ 33॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)