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mahabharat 12.28.32: इस प्रकार काल के प्रभाव से सभी प्राणी इच्छित और अवांछनीय वस्तुओं को प्राप्त करते रहते हैं। इच्छित और अवांछनीय वस्तुओं की प्राप्ति का अदृश्य के अतिरिक्त और कोई कारण नहीं प्रतीत होता ॥32॥   |   mahabharat अध्याय 12.28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 28: अश्मा ऋषि और जनकके संवादद्वारा प्रारब्धकी प्रबलता बतलाते हुए व्यासजीका युधिष्ठिरको समझाना  »  श्लोक 32
 
 
श्लोक  12.28.32 
इति कालेन सर्वार्थानीप्सितानीप्सितानिह।
स्पृशन्ति सर्वभूतानि निमित्तं नोपलभ्यते॥ ३२॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार काल के प्रभाव से सभी प्राणी इच्छित और अवांछनीय वस्तुओं को प्राप्त करते रहते हैं। इच्छित और अवांछनीय वस्तुओं की प्राप्ति का अदृश्य के अतिरिक्त और कोई कारण नहीं प्रतीत होता ॥32॥
 
In this manner, due to the influence of time, all beings keep on receiving desirable and undesirable things. There appears to be no other reason for the attainment of desirable and undesirable things except the unseen. ॥ 32॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)